Monday, 30 March 2020

Corona vs India (भारत की तैयारी)

Corona vs India (भारत की तैयारी) -:
 


    कोरोना जो एक वायरस चीन में उत्पन्न हुआ फिर उसके शहर वुहान में फैला और उसके बाद विश्व भर के बड़े बड़े देश में कोहराम मचाने के बाद अब भारत में भी विकराल रूप धरने कि ओर अग्रसर है और भारत भी इसको रोकने के लिए जी जान से जुटा हुआ है, इसका सबसे बड़ा उदाहरण भारत द्वारा जनता कर्फ्यू और फिर 21 दिन का कर्फ्यू है। इसका रूप दिन प्रतिदिन और भी खतरनाक होता जा रहा है पर इसके लिए जिम्मेदार कौन?


# सरकार बहुत पले से ही इसके बारे में नागरिकों को जागरूक कर रही है और इसका प्रकोप प्रतिदिन समाचार पत्रों और न्यूज चैनलों के माध्यम से  प्रसारित भी हुआ।


हम सब ने इटली चीन स्पेन और अमेरिका जैसे देशों को भी इसके सामने बेबस देखा।इस वायरस की कोई दवा इत्यादि भी अभी तक सामने नहीं आ सकी है इसी वजह से ये ज़रूरी था कि इसे फैलने से रोका जाए जिसके लिए कुछ मापदंडों और क्रियाओं को अपने जीवन का कुछ दिनों के लिए हिस्सा बनाने की जरूरत थी जैसे कि सामाजिक दूरी जिससे संपर्क घटे और वायरस के फैलने की गति धीमी हो और अंततः समाप्त हो जाए परन्तु ऐसा कुछ होता नजर नहीं रहा है कई जगह इसका पूर्णतः उल्लंघन किया जा रहा है और  इसी का दुषपरिणाम है कि आज पीड़ितों की संख्या इतनी तेजी से बढ़ रही है।


#  राजनीति ये वो शब्द है जिसे कुछ लोग सुनना भी पसंद नहीं करते और उनके तर्क भी कहीं हद तक जायज होते है और वो कुछ ऐसी परिस्थितियों में सच होते भी नजर आते हैं जो आज बनी हुई हैं। कुछ राजनेता इसे महज अफवाह बता कर लोगों का ध्यान खीच रहें हैं पर इसकी कीमत बहुत भारी हो सकती है और कल को उन्हें अपनी बातों का पछतावा भी हो सकता है पर तब पछताए होत का जब चिड़िया चुग गई खेत।


# मनोंरंजन की प्यास भारत के लोग मनोरंजन के भूखे और प्यासे जैसे दिखते हैं जिन्हें हर चीज में मनोरंजन तो चाहिए ही होता है जिन्होंने इस वायरस को भी एक मज़ाक के तौर पर लिया है और दिखाया है विभिन्न ऑनलाइन वीडियो इंटरटेनमेंट प्लेटफार्म पर आप को ऐसे वीडियो देखने को मिल जाएं गे और यही नहीं विभिन्न मीम्स पेज और सोशल साइट पर आपको इस तरह के पोस्टों की भरमार मिलेंगी जिसके कारण ये वीडियो और पोस्ट देखने वाले लोग भी इस ज्यादा गंभीरता से नहीं लेते है।


#व्यर्थ का आत्म विश्वास  कुछ लोग व्यर्थ के आत्म विश्वास में उलझे रहते है और उनका कहना होता है कि उन्हें यह वायरस कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता पर यह वायरस उसी परिवार का वायरस है जिसके सदस्य सर्दी और जुखाम के वायरस सदस्य हैं एक हल्की फुल्की सर्दी जुखाम से भी आप को बहुत सी समस्या का सामना करना पड़ता है और सर्दी जुखाम एक आम बात भी होती है पर अगर ऐसी आम बातों से हम समस्याओ के शिकार हो जाते हैं तो हम कैसे उसी परिवार के दूसरे वायरस से प्रभावित ना होने का दावा कर सकते हैं।यह एक बहुत ही गैर जिम्मेदाराना हरकत है जिसके लिए बाद में सिवाए पछतावे के कुछ भी हाथ नहीं लगेगा।

#धीरज की कमी  सरकार ने नागरिकों को सिर्फ घर में रहने के लिए कहा है जेल में नहीं पर फिर भी ऐसे व्यौहार को जायज कैसे कह सकते है कि साकार के इस अहवाहन को भी कुछ लोग मानने को तैयार नहीं।सरकार हमें उसी घर में रहने के लिए निर्देशित कर रही है जो हमारा अपना है जिसमें हमारा अपना परिवार रहता है और जिनसे दूर रहकर दिनभर काम करना हमारे लिए बड़ी मुश्किल की बात थी पर आज हम बाहर की ओर ऐसे भाग रहे है मानों हमें घर में नजर बंद करके खाना पीना भी बंद कर दिया हो इन्हीं कारणों से ऐसा प्रतीत होता है जैसे हमारी धीरज की छमताएं पूर्णतया खत्म हो चुकी हैं।और हम अपने लिए भी कुछ करने को तैयार नहीं हैं।


#धर्म का अल्प ज्ञान  लोग धर्म और भगवान को अपना रखवाला समझकर कुछ भी परहेज या उपचार नहीं करते हैं पर उन्हें ये समझना होगा कि प्यासे के लिए भगवान ने प्राकृतिक स्रोत दे रक्खे हैं पर आप प्यास में उन्हिके हाथ से पानी पीने की जिद नहीं कर सकते क्योंकि यदि एक बार प्यास बुझा भी दी गई तो प्यास पुनः फिर लगेगी ही लगेगी और हर बार आप इसी बात पर आश्रित नहीं रह सकते।कोई भी धर्म उपचार का विरोध नहीं करता और कोई भी धर्म चमत्कार नहीं करता क्योंकि जो चमत्कार है वो धर्म नहीं हो सकता।


# संविधान एक देश को चलाने के लिए एक महत्वपूर्ण इकाई होती है पर कुछ लोग इसी का सहारा लेकर गलत काम करते नजर आते हैं इसका एक कारण संविधान की दरियादिली और  दूसरा कारण लोगों का अधूरा ज्ञान है, यहां समझने वाली बात ये है कि संविधान ने हक ज्यादा दे रखे हैं या बंदिशें कम लगा रक्खी हैं जो आज समाज के लिए बहुत भारी पड़ रहा है।


    ये कुछ तथ्य है जो भारत की कोरॉना के खिलाफ तैयारियों के बीच में आ रही है और इनसे निपटना ज़रूरी है।

आर्टिकल को पड़ने के लिए धन्यवाद आशा करता हूं कि आपको जरूूर पसन्द आया होगा।

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