सफलता-:
यह एक ऐसा शब्द है जो हर व्यक्ति के जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है या यूू कहें कि हर व्यक्ति इसे अपने जीवन में पाना चाहता है या अपने जीवन की कमी इस शब्द से पूरी करना चाहता है।
परंतु सोचने वाली बात यह है कि वास्तव में सफलता है क्या?
क्या है यह सफलता?
किसे सफलता माने? किसे सफलता ना माने ? और किसे असफलता माने?
क्या किसी चीज को सोच कर उसको पूर्ण कर लेना या हासिल कर लेना ही सफलता है?
या सफलता इससे परे कुछ अलग ही है।
अगर किसी व्यक्ति को ₹4000 की जरूरत है और उससे ₹4000 प्राप्त हो जाते हैं तो क्या वह सफल हो गया।
या अगर कोई व्यक्ति एक नौकरी करना चाहता है और वह मेहनत कर कर नौकरी प्राप्त कर लेता है तो क्या वह सफल हो गया क्या यही उसकी सफलता है?
और अगर यह सफलता नहीं तो घूम फिर कर हमारा सवाल फिर वही का वही आ जाता है यह सफलता है क्या? आखिर क्या है यह सफलता ? इसे कैसे समझे?
चलिए जरा इस तरह सोचते हैं।
आज मुझे दफ्तर जाना है और बहुत जरूरी मीटिंग है और समय 9 बजे का है , मैं पूरी तरह से वक्त का खयाल रखते हुए बिल्कुल समय पर अपनी मंजिल या अपने लक्ष्य तक पहुंच गया मीटिंग अपने टाइम से शुरू हो गई जो मैंने सोचा था वो पूरा हो गया और मैं सफल हो गया..
पर जरा ठहरो जो मीटिंग के सबसे जरूरी चीज जो फाइल थी वो तो घर ही भूल गया,
अब बताइए क्या मैं सफल हुआ??
पर अब एक तथ्य जो सामने आ रहा है कि क्या मै असफल हो गया?
पर मैंने लक्ष्य तो मीटिंग पर पहुंचने का बनाया था तो मै असफल कैसे और मेरी मीटिंग खराब हो गई तो में सफल कैसे?
बस यहीं से सोचने वाली सबसे महतवपूर्ण बात निकलती है हम आधी बातों को ही सोचकर उसको अपने अनुसार परिभाषित करते हैं,वास्तव में ये शब्द सिर्फ एक परिभाषा में नहीं बांधा जा सकता सफलता एक ऐसा शब्द है जो भिन्न परिस्थितियों में भिन्न हो सकता है और भिन्न व्यक्ति और व्यक्तित्व के लिए भिन्न भिन्न हो सकता है और सिर्फ इतना ही नहीं भिन्न स्थितियों के लिए भी भिन्न हो सकता है। हर परिस्थिति में हम इसे अलग तरह से सोंच सकते हैं और प्रत्येक भिन्न कार्य के लिए हमारे माप दंड भी भिन्न हो सकते हैं।
अब आते हैं पुनः अपने प्रारंभिक प्रश्नों पर ,
कि4000रुपए मिल गए वो सफलता है पर अगर गलत तरह से आएं हों तो कितने लोग इसे सफलता का दर्जा देंगे सायद कोई नहीं,
अगर मुझे कोई नौकरी चाहिए मैंने सिविल सर्विसेज चुना पर किसी छोटे एग्जाम को पास करने के बाद क्या मैं खुद को सफल मानू।
मतलब घन दौलत शिक्षा नौकरी सफलता नहीं है।
नहीं सफलता कुछ और है ये नहीं
तो आखिर क्या है सफलता ?
यूं तो सफलता हर किसी के लिए हर परिस्थिति में अलग होती है पर अगर हम कुछ इस तरह इसे कहें तो ?
कि सफलता हम अपने लिए कुछ माप दंड कुछ विशेष परिस्थतियों में कुछ विशेष लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए तय किया माप दंड है और यही सफलता कही जा सकती हैै।
पूरा पढ़ने के लिए बहुत बहुत घन्यवाद, उम्मीद करता हूं, आपको यह टिप्पणीं पसन्द आयी होगी।